कविता मेरी डायरी से।
बेगाने होते लोग देखें,अ
जनबी होता शहर देखा,
हर इंसान को यहां,
मैंने खुद से ही बेखबर देखा।
रोते हुए नयन देखें,
मुस्कुराता हुआ अधर देखा,
गैरों के हाथों में मरहम,
अपनों के हाथों में खंजर देखा।
मत पूछ इस जिंदगी में,
इन आंखों ने क्या मंजर देखा,
मैंने हर इंसान को यहां,
बस खुद से ही बेखबर देखा।
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