नई दिल्ली: मैं भारत और पीएम मोदी के बहुत करीब, हमारे बीच अच्छे संबंध; डोनाल्ड ट्रंप के बदल रहे तेवर- 19 सितंबर शुक्रवार 2025/26
नई दिल्ली: मैं भारत और पीएम मोदी के बहुत करीब, हमारे बीच अच्छे संबंध; डोनाल्ड ट्रंप के बदल रहे तेवर-
19 सितंबर शुक्रवार 2025/26
नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के संबंध एक बार फिर से पटरी पर लौट रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत और पीएम मोदी की तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं। गुरुवार को ब्रिटेन की यात्रा पर पहुंचे राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए एक बार फिर पीएम मोदी और भारत के साथ अपने रिश्तों पर बात की। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी और भारत के बेहद करीब है। उनकी दोस्ती बहुत अच्छी है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उन्होंने यूरोप की धरती पर खड़े होकर रूसी तेल खरीदने के लिए यूरोपीय देशों की आलोचना की है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बगल में खड़े ट्रंप ने तर्क दिया कि अगर यूरोप ऐसे ही रूस से तेल खरीदता रहता है तो यह मॉस्को को अलग-थलग करने के प्रयासों को कमजोर करता है।
ट्रंप ने यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा, "मुझे जानकारी है कि यूरोपीय देश बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीद रहे हैं।और जैसा की आप जानते हैं कि मैं भारत के प्रधानमंत्री मोदी और भारत के बहुत करीब हू्ं। मैंने पिछले दिनों उनसे बात की और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन, आप जानते हैं कि मैंने उन पर भी टैरिफ लगाए हैं।" ट्रंप ने आगे कहा, "इस समय चीन भी अमेरिका को बड़ी मात्रा में टैरिफ दे रहा है। मैं और भी चीजें करने के लिए तैयार हूं... लेकिन तब नहीं जिनके (यूरोपीय देशों) लिए मैं लड़ रहा हूं, वही रूस से तेल खरीद रहे हैं। अगर तेल की कीमतें कम होती हैं तो रूस आसानी से समझौता कर लेगा। और तेल की कीमतें काफी कम हो गई हैं।" गौरतलब है कि ट्रंप का यह बयान विदेश मंत्री एस जयशंकर की बात की पुष्टि करता है। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद जब से भारत ने रूसी तेल की खरीद शुरू की थी, तब से यूरोप की तरफ से लगातार भारत के ऊपर निशाना साधा जा रहा था। उस वक्त जयशंकर ने सीधा सा जवाब देते हुए कहा था कि भारत जितना तेल हफ्ते भर में खरीदता है, उससे ज्यादा रूसी तेल और गैस यूरोप केवल एक दोपहर में खरीद लेता है। ट्रंप के बाद उनके इस बयान की पुष्टि हो गई है। ट्रंप ने सीधे तौर पर कहा है कि
रूस को आर्थिक रूप से तोड़ने के लिए उन्होंने भारत से अच्छे संबंध होने के बाद भी टैरिफ लगा दिए।चीन पर भी रूसी ऊर्जा खरीद के लिए टैरिफ हैं, लेकिन जिस यूरोप के लिए वह यह सब कर रहे हैं, वह लगातार रूसी सामान खरीद रहा है।
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