Mon , Sep 29 2025
माँ महागौरी का रंग अत्यंत गोरा (सफेद) होता है, इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है।
एक हाथ में त्रिशूल (त्रिशूल से बुराई का नाश करती हैं)दूसरे हाथ में डमरू (शिव से संबंध को दर्शाता है)तीसरे हाथ से वर मुद्रा औरचौथे हाथ से अभय मुद्रा (भक्तों को आशीर्वाद देती हैं)
यह स्वरूप शांति, करुणा और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है।
महागौरी की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में शुद्धता व समृद्धि आती है।विशेष रूप से यह दिन कन्या पूजन (कंजक पूजन) के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
🪔 1. पूजन की तैयारी:प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र पहनें (सफेद वस्त्र श्रेष्ठ माने जाते हैं)
माँ को सफेद फूल, सफेद चूनरी और सफेद मिठाई अर्पित करें,जल, अक्षत, कुमकुम, रोली, फूल, दीपक, धूप, नैवेद्य आदि रखें
कलश स्थापना करें (यदि पहले दिन नहीं किया था)
दीप प्रज्वलित करें और माँ को ध्यानपूर्वक नमन करें
माँ को चावल, फूल, अक्षत अर्पित करें
फिर नीचे दिया गया मंत्र जपें
सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणी नमोऽस्तुते॥
माँ को हलवा, पूड़ी, चने का भोग बहुत प्रिय है
साथ में नारियल, मिश्री, और सफेद मिठाई भी अर्पित करें
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी के दिन कन्या पूजन कर कन्या भोजन जरूर करवाए नौ कन्याओं और एक लंगुर (बालक) को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा दे।
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