Fri , Mar 06 2026
हकीकत की चोटः
मेरे शहर का सबसे मशहूर हलवाई, जिसका सपना एक बड़ा 'ब्रांड बनना था,हमेशा एक ही बात
कहता था-"अगले महीने नई मशीनें लगाऊंगा,
अभी तो सब सही चल रहा है।" वह 'परफेक्ट' वक्त
का इतज़ार करता रहा, पर वक्त ने उसका इंतज़ार
नहीं किया। एक रात अचानक हार्ट अटैक आया
और वह अधूरा सपना वहीं दम तोड़ गया। आज
उसकी दुकान खंडहर बन रही है क्योंकि उसने
'सिस्टम' बनाने के बजाय खुद को 'कल' के भरोसे
छोड दिया था। लॉजिक यह है कि धंधा आपकी उम्र
या फुर्सत का इंतज़ार नहीं करता। कड़वा सच यह
है कि बाज़़ार में कल जैसा कोई शब्द नहीं होता,
सिर्फ 'अभी' ही साम्राज्य खड़ा करता है।
Execution over Perfection: परफेक्ट वक्त
कभी नहीं आता; टूटे औजारों से ही युद्ध शुरू
करो, जीतते -जीतते सब ठीक हो जाएगा।
कामयाबी का दुश्मन क्या है? Comment??
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