Wed , Mar 11 2026
धंधा हाथ की कारीगरी,
या चाक की रफ्तार?
story.
एक कुम्हार खुद मटके बनाता था, दिन मे सिर्फ
5 मटके बिकते । उसने अपना हाथ छोडकर एक
'साचा बनाया और 2 लडकों को काम पर रखा।
अब रोज 500 मटके बनते है और वो गद्दी पर
बैठकर सिर्फ हिसाब देखता है।
Reason:
अगर आप खुद ही अपनी दुकान के वेटर,
कैशियर और झाडू लगाने वाले हैं, तो आप कभी
आजाद नहीं होंगे । धंधा तब बडा होता हैं जब
आप खुद को सिस्टम' से रिप्लेस कर देते है।
अपनी जगह काबिल Assets (स्टाफ) रखो।
Lesson:
मजदूर मत बनो, सिस्टम के मालिक बनो।
क्या आप अपने धंधे में खुद को आजाद
कर पाए हे? बताना जरूर।
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